इक दिन चले हम उसकी तारीफ़ में,

इक दिन चले हम उसकी तारीफ़ में,
लिखने एक कविता |
फिर जाना की क्या लिखे उसके लिए ,
जब शब्द वही और कवी वही है |

फिर सोचा लिखे इक गीत कुछ ऐसा ,
जो व्यक्त करे भक्ति हमारी |
फिर जाना क्या गाएँ तारीफ़ में उसकी ,
जब सुर वही और साज़ वही है |

नए कपड़ों से सजाया मंदिर ,
और सोचा कुछ पकवान बनाए |
जब बनाने लगे उनके लिए प्रसाद तो जाना ,
फल में रस और स्वाद वही है |

क्या अर्पण करें उस ईश्वर को ,
क्या दें उसे जिसका कुछ मोल हो ,
जब मेरी तो हर सांस वही ,
और कढ़ कढ़ का आस्तित्व वही है |

इक दिन चले हम उसकी तारीफ़ में,
लिखने एक कविता |
फिर जाना की क्या लिखे उसके लिए ,
जब शब्द वही और कवी वही है |

-In love with God
Disha, Aug 2017

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Author of "My Beloved's MBA Plans", "Because Life Is A Gift" & "Corporate Avatars"

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