कभी तो..

कभी तो पलट के वो भी देखता होगा ,
खुद में मुझे न पाकर ;
कभी तो वो भी मुझे ढूंढता होगा ,
उन्ही रास्तों पर दोबारा चल कर

कभी तो उसे भी मेरे होने का एहसास होता होगा ,
अपनों के बीच अचानक से ;
जैसे कभी हुए ही न हो फासले इतने ,
जैसे मैं आ जाऊ चुपके से

कभी तो वो भी हँसता और रोता होगा ,
मेरी उन बातों को याद कर ;
कभी तो वो यादें करती होंगी उसे भी बेचैन ,
जैसे कर जाती हैं मुझे अधूरा उसका साया बन कर

कभी कहीं किसी पल इस ज़िन्दगी में ,
हम होंगे फिर आमने सामने कभी तो ;
उस पल के इंतज़ार में खड़ी हूं वही ,
जहाँ कभी छोड़ गए थे कभी वो

लोग पूछते हैं मुझसे क्यूँ तन्हा हूं इस सफर में ,
क्यूँ कोई नहीं हमसफ़र मेरा ;
उसकी यादों के साथ कहाँ अकेली हूँ कैसे कहूँ उन्हें ,
साँसों के उस तरफ़ फिर होगा साथ हमारा

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Author of "My Beloved's MBA Plans", "Because Life Is A Gift" & "Corporate Avatars"

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